बिलासपुर के 28 लाख के धान घोटाले का ‘भूत’ बेलगाम: 3 प्यादे जेल में, असली बादशाह लव कुमार यादव पुलिस को दे रहा खुली चुनौती!
गतौरा धान खरीदी केंद्र: 'गबन-गैंग' का पर्दाफाश अधूरा, पुलिस की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल - क्या किसी सफेदपोश का वरदहस्त है फरार लव कुमार पर?

मस्तुरी, बिलासपुर – बिलासपुर पुलिस के ‘ऑपरेशन क्लीन’ की पोल खुलती नजर आ रही है! गतौरा में हुए 28 लाख 51 हजार के सनसनीखेज धान घोटाले में पुलिस ने भले ही तीन मोहरों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपा ली हो, लेकिन इस पूरे ‘सरकारी लूट-तंत्र’ का असली खेवनहार, धान खरीदी प्रभारी लव कुमार यादव, अब भी कानून के शिकंजे से बेखौफ घूम रहा है। पुलिस की यह नाकामी नहीं तो और क्या है कि नामजद आरोपी हफ्तों बाद भी गिरफ्त से बाहर है और सिस्टम मूकदर्शक बना हुआ है।
919 क्विंटल धान ‘हवा’ कर दिया, खजाने पर डाला 28 लाख का डाका
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में गतौरा सेवा सहकारी समिति केंद्र पर किसानों के खून-पसीने की कमाई को सफेदपोश लुटेरों ने मिलकर चट कर दिया। संयुक्त जांच दल के भौतिक सत्यापन में 919.96 क्विंटल धान कम मिला, जिसकी कीमत ₹28,51,000 है। यह कोई गलती नहीं, बल्कि सरकारी नियमों को रौंदकर किया गया सुनियोजित गबन था।
इस लूट में संस्था प्रबंधक कोमल चंद्राकर, प्राधिकृत अध्यक्ष राजेंद्र राठौर, कंप्यूटर ऑपरेटर हुलेश्वर धीरही और धान खरीदी प्रभारी लव कुमार यादव की मिलीभगत सामने आई। FIR नंबर 213/2025, BNS धारा 316(5) के तहत केस दर्ज हुआ।
3 गिरफ्तार, 1 ‘वीआईपी फरार’?
03.04.2026 को पुलिस ने कोमल चंद्रकार, राजेन्द्र राठौर और हुलेश्वर धीरही को दबोचकर जेल भेज दिया। वाहवाही लूटने में पुलिस पीछे नहीं रही।
मगर असली खेल तो अब शुरू हुआ है – लव कुमार यादव कहां है?
धान खरीदी का पूरा ‘काला कारोबार’ बिना प्रभारी के इशारे के हो ही नहीं सकता। स्टॉक रजिस्टर से लेकर ऑनलाइन एंट्री तक, हर जगह उसी के साइन और पासवर्ड चलते हैं। 919 क्विंटल धान ट्रक में भरकर रातों-रात गायब हो गया और प्रभारी को भनक तक नहीं? ये कहानी किसी के गले नहीं उतर रही। साफ है कि लव कुमार यादव इस घोटाले का मास्टरमाइंड है।
पुलिस की ‘मजबूरी’ या ‘मिलीभगत’?
सबसे बड़ा सवाल यही है। जब पुलिस 3 आरोपियों को 12 घंटे में उनके बिल से खींच लाई, तो लव कुमार यादव को पकड़ने में पसीने क्यों छूट रहे हैं?
क्या लव कुमार यादव पुलिस से ज्यादा स्मार्ट है? क्या वो सर्विलांस, साइबर ट्रैकिंग और मुखबिरों के जाल को चकमा दे रहा है?
या फिर किसी ‘ऊपर वाले’ का फोन आ गया है? क्या किसी राजनीतिक या प्रशासनिक रसूखदार का हाथ उसके सिर पर है, जिसकी वजह से पुलिस के हाथ बंधे हुए हैं?
जब 50-50 लाख के इनामी नक्सली पकड़े जाते हैं, तो एक क्लर्क लेवल का कर्मचारी फरार कैसे? यह बिलासपुर पुलिस की काबिलियत पर सीधा तमाचा है।
किसानों में गुस्सा है। उनका कहना है, “छोटी मछलियां तो पकड़ लीं, मगरमच्छ को किसने बचा रखा है?” पुलिस की रटी-रटाई लाइन कि “तलाश जारी है” अब जनता को बेवकूफ बनाने जैसी लग रही है।
पुलिस विभाग को देना होगा जवाब
जब तक लव कुमार यादव की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक यह पूरा ‘ऑपरेशन क्लीन’ एक दिखावा, एक ढोंग से ज्यादा कुछ नहीं। जनता जानना चाहती है कि आखिर 28 लाख के घोटाले के मुख्य आरोपी को पकड़ने में बिलासपुर पुलिस को कितने दिन और चाहिए? या फिर फाइल बंद करने की तैयारी चल रही है?
जनता पूछ रही है – लव कुमार यादव कब जाएगा जेल?




